आम्रपाली कोल परियोजना हो या मगध कोल परियोजना को सेंट्रल कोलफिल्ड्स फाइव स्टार रेटिंग दी है!
आम्रपाली कोल परियोजना को फाइव स्टार रेटिंग मिलने तक कितने विस्थापित-प्रभावित लोगों को मौत के साये तले नाम अर्जित किया है।
अरबों,करोड़ो रूपये मुनाफा देने वाली आम्रपाली कोल परियोजना के भू-दाता अंधेरों तले जिंदगी बिताने को मजबूर हैं!
कोल परियोजना खुले 10 वर्ष होने के बावजूद भी सीसीएल की मूल-भूत सुविधाओं से विस्थापित-प्रभावित वंचित हैं!
आम्रपाली परियोजना की महाप्रबंधक की तानाशाही रवैया से आज भी मौत के साये से स्थानीय ग्रमीण तथा राहगीरों बिंगलात गाँव से उड़सू गाँव तक आवागमन करते हैं!
कभी भी बड़ी घटनाओं का चुनौती दे रहा है लकराही मोड़,धूलकणों की सायों के बीच आमरहगीरों करते हैं आवागमन!
सीसीएल की जुमलें नीति से निवास करने वालें कुमरांगकला के टोला मनवाटोंगरी के दलित परिवार भोजन की जगह धूलकणों की आहार लेनें पर मजबूर।
विस्थापित-प्रभावितों को मूल भूत- सुविधाओं देने पर सीसीएल की सिस्टम शिक्षा, बिजली,बेहतर विस्थापन नीति,भूमि के बदले नौकरी देने में नाकाम रहा है।
https://youtu.be/on6jLtixQf8?si=Ib-g8yvR7qkC8GTR
आम्रपाली कोल परियोजना खुले 10 वर्ष होने के बावजूद भी विस्थापित भू-दाताओं बदहाली जिंदगी जीने पर विवस हैं!
जिला रिपोर्टर:आकाश पासवान
टंडवा:-(चतरा) टंडवा प्रखंड क्षेत्र में संचालित बहुचर्चित सीसीएल के आम्रपाली व मगध कोल परियोजना को वित्तीय वर्ष 2022-23 में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बेहतरीन प्रदर्शन से प्रसन्न होकर कोल मंत्रालय ने हाल हीं फाइव स्टार रेटिंग दिया है। कुल 216 खदानों के सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर चार खदानों में शामिल हैं। वहीं मिली उपलब्धियों से जहां कोल अधिकारी पूरे गदगद हैं जबकि विस्थापित-प्रभावित जनता का मिज़ाज टटोलने पर उनमें घोर निराशा व असंतोष का भाव साफ़ झलकता दिखाई देता है।इस मामले में कुल मिलाकर बड़े वजहों की बात करें तो कोयले के उड़ते भारी धूलकणों से पूरे क्षेत्र में हो फैलने वाले घातक प्रदूषण, अनियंत्रित कोल वाहनों के परिचालन से सैंकड़ों लोगों की हो रही सड़क दुर्घटनाओं में असामयिक दर्दनाक मौत, असमान मुआवजा नीति की मार से आश्रितों को होने वाली मशक्कत, रोज़ी- रोजगार के नाम पर विस्थापित -प्रभावितों के साथ खोखला वादा और छलावा,मूलभुत सुविधाओं के नाम पर विकास का कागज़ी ढोंग समेत अन्याय मुद्दे भी सामने आये। भू-रैयतों की मानें तो जमीनों के नीचे कोयला जैसा मूल्यवान खनिज होना अब उनके लिए मानों कोई अभिशाप सा प्रतीत होने लगा है।भारी प्रदूषण का असर उनके स्वास्थ्य में प्रतिकूलता दिखने लगा है, ग्रामीण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लगातार जूझ रहे हैं। जबकि प्रबंधन की ओर से खानापूर्ति करते हुवे स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर कुछ मुफ्त दवाईयां कभी- कभी दी जाती है। कुछ लोगों ने तंज कसते हुवे कहा कि कोल कंपनियों का सब्जबाग व औद्योगिकीकरण की आंधी में ग्रामीण सड़कों पर भी लोगों का सुकून के साथ चलना दूभर हो गया है बेमौत वाला भयाक्रांत माहौल इतना उग्रवादियों ने भी नहीं बनाया। कहा जा रहा है कि सीसीएल कोल उत्पादन व संप्रेषण कर एक रिकार्डेड उपलब्धि जिसे अपने नाम की है उसमें गुमनाम सैंकड़ों लोगों की मौत व मूकदर्शी सहनशील बने होकर विस्थापित -प्रभावित परिवारों के कुछ हिस्से में श्रेय जाना चाहिए।ज़हरीले वातावरण में स्वास्थ्य जनित समस्याओं से जूझते हुवे ग्रामीण जहां धीरे-धीरे असमय मौत के मूंह में जा रहे हैं।क्षोभ व्यक्त किया गया कि अभी जश्न के शोर में विस्थापित -प्रभावित परिवारों की आह भले दब जाये पर कभी ना कभी नेताओं व अधिकारियों तक उनकी चीखें जरुर सुनाई देगी। तब निश्चय हीं शोषण व दमन से उपार्जित जश्न मनाने वालों में अगर कुछ भी संवेदना शेष बचे तो उन्हें अवश्य आत्मग्लानि से भर देगा।
👇कोल परियोजना के दृश्य के तस्वीरें

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