प्रधानमंत्री पद के लिए कौन है जनता की पहली पसंद? CSDS-लोकनीति के सर्वे में आए ये आंकड़े
CSDS Pre Poll Survey: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देश में चुनावों पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) ने लोकनीति के साथ मिलकर एक प्री पोल सर्वे किया है।
Dainik Aawaz News: लोकनीति ने इस सर्वे में देश में प्रधानमंत्री पद के लिए कौन स नेता ज्यादा दावेदार है इस पर बात की गई है। इसके साथ ही यह सवाल भी पूछा गया है कि, लोग नरेंद्र मोदी सरकार को दोबारा क्यों चुनना चाहते हैं? आइए आपको बताते हैं इन सवालों पर लोगों की क्या है राय।
67 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी और 27 फीसदी लोग राहुल गांधी को किया पसंद
लोकनीति-CSDS के इस बात पर सर्वे कि, आगामी लोकसभा चुनाव में जनता किसे देश के प्रधानमंत्री के रूप में पसंद कर रही है. सर्वे में शामिल लोगों में से 48 फीसदी लोगों ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पीएम पद के लिए पसंद कर रहे है. विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राहुल गांधी को 27 फीसदी लोग देश के पीएम के तौर पर देखना चाहते है. दिलचस्प बात ये है कि, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल , बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को 3-3 फीसदी लोग पीएम के तौर पर पसंद कर रहे है. वहीं सर्वे में 6 फीसदी लोग किसी अन्य चहरें को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते है. वैसे CSDS के सह-निदेशक संजय कुमार का मानना हैं कि, देश में पीएम मोदी की लोकप्रियता बरकरार है और चुनावों में शायद ही कोई बदलाव हो।
लोग नरेंद्र मोदी सरकार को दोबारा क्यों चुनना चाहते हैं?
इस सवाल एक जवाब की देश के मतदाता नरेंद्र मोदी को एकबार फिर से पीएम क्यों चुनना चाहते है? CSDS-लोकनीति के इस सर्वे में जनता का जवाब ये था-
- अच्छा काम- 42 फीसदी
- कल्याण योजनाओं से लाभ- 18 फीसदी
- मोदी एक महान नेता हैं- 45 फीसदी
- - राम मंदिर- 16 फीसदी
- आर्टिकल 370 को हटाना- 10 फीसदी
- दुनिया में भारत की छवि सुधरी है- 15 फीसदी
- हिंदुत्व- 30 फीसदी
"सर्वे में बीजेपी+ को 54 फीसदी तो वहीं कांग्रेस+ को 27 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. यानी वोट शेयर के मामले में बीजेपी, कांग्रेस से आगे निकलती हुई दिखाई दे रही है।"
हालांकि सर्वे से आए आंकड़ों पर CSDS के संजय कुमार का मानना हैं कि, मेरी राय में देश में मोदी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का कोई संकेत नहीं है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि, देश की जनता में 2019 के चुनाव की तुलना में इस बार के चुनाव में अधिक उत्साह का संकेत भी नहीं है।

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