आरटीई की कठिन शर्तों और जमीन की बाध्यता के साथ झारखंड में निजी विद्यालयों का संचालन असंभव; आलोक कुमार दूबे
आरटीई की कठिन शर्तों और जमीन की बाध्यता के साथ झारखंड में निजी विद्यालयों का संचालन असंभव; मामले पर संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाएं माननीय शिक्षा मंत्री: आलोक कुमार दूबे राष्ट्रीय अध्यक्ष पा स वा
माननीय शिक्षा मंत्री श्री बैजनाथ राम को आरटीई की कठिन शर्तों को निरस्त करने के लिए पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार दूबे ने सौंपा ज्ञापन; शिक्षा मंत्री ने बहुत जल्द सकारात्मक कदम उठाने का दिया आश्वासन!
Dainik Aawaz Newz, आज दिनांक 22 जुलाई 2024 दिन सोमवार को पब्लिक स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने झारखंड में निजी विद्यालयों को हो रही समस्याओं और आर टी ई की कठिन शर्तों को अवगत कराने एवं निजी विद्यालयों के हित में उन्हें निरस्त करने हेतु झारखंड के शिक्षा मंत्री बैजनाथ राम से उनके आवास पर मुलाकात की तथा झारखंड के शिक्षा मंत्री माननीय श्री बैजनाथ राम जी को गैर मान्यता प्राप्त निजी विज्ञानियों को मान्यता देने हेतु जमीन की बाध्यता समाप्त करना एवं पिछली सरकार द्वारा 2019 में लागू आरटीई कानून निरस्त करने के संदर्भ में एक ज्ञापन सौंपा तथा माननीय शिक्षा मंत्री से इस विषय पर विस्तृत वार्ता की।
माननीय शिक्षा मंत्री बैजनाथ राम ने बहुत ही गंभीरता से बहुत देर तक पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे से इस विषय पर विस्तृत चर्चा की, निजी विद्यालय के सकारात्मक संचालन हेतु ढेर सारे विकल्पों पर चर्चा की गई और माननीय शिक्षा मंत्री जी ने यह विश्वास दिलाया कि सरकार इस बात का विशेष ध्यान रखेगी की झारखंड में निजी विद्यालयों के संचालन हेतु इन्हें कोई समस्या ना हो और कोई ना कोई सकारात्मक कदम अवश्य उठाएगी सरकार।
माननीय शिक्षा मंत्री जी ने पब्लिक स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष को बताया कि झारखंड में सरकार शिक्षा के विकास को लेकर बहुत ही संजीदा है और निश्चित रूप से निजी विद्यालयों के राह में आने वाली रूकावटों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
जमीन की बाध्यता के विषय पर विशेष चर्चा हुई और माननीय शिक्षा मंत्री ने इस बात से सहमति जताई कि वर्तमान स्थिति में जमीन संबंधी कानून में संशोधन अनिवार्य है।
पब्लिक स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने माननीय शिक्षा मंत्री जी को बताया कि संपूर्ण राष्ट्र में निजी विद्यालयों के संचालन के लिए जो आरटीई की कानून है उसे ही झारखंड में लागू करने की आवश्यकता है, पिछली सरकार ने आरटीई की कानून में ऐसे ऐसे संशोधन कर दिए जिनका अनुपालन निजी विद्यालयों के लिए संभव नहीं है, अतः जिस तरह संपूर्ण राष्ट्र में आरटीई के लिए अलग कानून और झारखंड में आरटीई के लिए संशोधित कानून या कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है।
माननीय शिक्षा मंत्री ने पब्लिक स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे को यह विश्वास दिलाया कि झारखंड सरकार के पास चुनाव के पूर्व समय बहुत कम है फिर भी कोई ना कोई सकारात्मक कदम अवश्य उठाएगी सरकार।
पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे के साथ माननीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात करने के दौरान पासवा के प्रदेश सचिव संजीत कुमार यादव भी उपस्थित थे।
माननीय शिक्षा मंत्री जी को पासवा द्वारा सौंपा गया मांग पत्र / ज्ञापन
सेवा में,
माननीय बैजनाथ राम जी शिक्षा मंत्री
झारखंड सरकार
विषय :- गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को मान्यता देने हेतु जमीन की बाध्यता कानून एवं पिछली सरकार द्वारा 2019 में लागू आरटीई संसोधन कानून निरस्त करने के संदर्भ में।
महाशय,
उपरोक्त विषय पर निवेदन पूर्वक कहना है कि पिछली झारखंड सरकार द्वारा 2019 में पारित संशोधन नियमावली में मध्य विद्यालय वर्ग कक्षा 1 से 8 तक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में एक एकड़ और शहरी क्षेत्रों में 75 डिसिमल जबकि प्राथमिक विद्यालय वर्ग कक्षा 1 से 5 तक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 60 डिसिमल और शहरी क्षेत्रों में 40 डिसमिल जमीन की बाध्यता की गई है।
मूल आरटीई कानून में जमीन की बाध्यता नहीं है उसमें सर्वकालिक भवन की बात कही गई है अर्थात विद्यालय के पास एक ऐसा भवन होना चाहिए जो सर्दी, गर्मी तथा बरसात तीनों मौसम में बच्चों की पढ़ाई हो।
अतः होना यह चाहिए कि;-
1. जमीन की बाध्यता शब्द को विलुप्त व पूर्ण रूपेण समाप्त किया जाना चाहिए ।
2. जमीन की न्यूनतम अथवा अधिकतम सीमा समाप्त की जानी चाहिए।3. विद्यालय की मान्यता के लिए मूल आरटीआई में वर्णित प्रावधान सर्वकालिक भवन की बाध्यता की जानी चाहिए जो विद्यालय के ट्रस्ट अथवा सोसाइटी के नाम से रजिस्टर्ड हो अथवा लीज पर हो।
4. यही प्रावधान सरकारी विद्यालय के लिए भी है।5. जमीन के प्रश्न पर सरकारी विद्यालयों और निजी विद्यालयों के लिए एक ही मापदंड पर मान्यता दी जानी चाहिए।
6.महाशय का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहना चाहता हूं कि सरकारी विद्यालयों के लिए जमीन की कोई बाध्यता नहीं है उसी तरह निजी विद्यालयों के लिए भी जमीन की कोई बाध्यता नहीं होनी चाहिए। पिछली रघुवर सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए 5000 से अधिक सरकारी विद्यालयों को बंद कर दिया गया था तथा हजारों छोटे निजी विद्यालयों को बंद करने के लिए मूल आरटीई कानून रहने के बावजूद आरटीई में 2019 के कठिन संशोधन शर्तों को जोड़ा गया जिसका पालन करना किसी भी निजी विद्यालय के लिए संभव ना हो और झारखंड के हजारों निजी विद्यालय बंद हो जाएं तथा गरीब, दलित, आदिवासी बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाए।
पिछली सरकार ने निजी विद्यालयों के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए 2019 का आरटीआई संशोधन सिर्फ और सिर्फ निजी विद्यालयों पर ही लागू किया था, यहां तक की झारखंड के सरकारी विद्यालयों में भी 2019 के संशोधन अधिनियम को लागू नहीं किया था।
अतः श्रीमान से निवेदन है की संपूर्ण भारत में लागू नियम भारत सरकार द्वारा मूल आरटीई अधिनियम 2009 एवं राज्य सरकार द्वारा जारी मूल आरटीई अधिनियम 2011 के तहत झारखंड में विद्यालयों को मान्यता दे तथा 2019 के संशोधन को निरस्त किया जाए,ताकि झारखंड में लगभग 47,000 से अधिक गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को मान्यता मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
आदर सहित
आलोक कुमार दूबे
राष्ट्रीय अध्यक्ष पासवा


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