झारखण्ड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ को आखिर क्यों जाना पड़ा हड़ताल पर?
झारखण्ड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (समाहरणालय संवर्ग) झारखण्ड राँची, जो समाहरणालय एवं संलग्न कार्यालयों के अन्तर्गत कार्यरत कर्मियों का संगठन है, जो झारखण्ड के 2024 की अनुमानित 4,01,29,000 (चार करोड़ एक लाख उनतीस हजार) की आबादी (जिला, अनुमंडल, अंचल/प्रखंड स्तर पर) के लिए सरकार की सभी प्रकार की सेवाओं को उपलब्ध कराने वाली सबसे महत्त्वपूर्ण कड़ी है।
झारखण्ड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (समाहरणालय संवर्ग) झारखण्ड राँची द्वारा समाहरणालय के अन्तर्गत कार्यरत कर्मियों के वेतनमान, पदनाम आदि विसंगतियों को दूर करने लिए संघ के पत्रांक-68 दिनांक-15.10.2022 के माध्यम से 28 सूत्री मांग को सरकार के समक्ष रखा गया एवं सरकार का ध्यान आकृष्ट करने हेतु विभिन्न संवैधानिक तरीकों को अपनाया गया। हमारी मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता एवं उपेक्षापूर्ण नीति के कारण संघ द्वारा पत्रांक-03 दिनांक-11.01.2023 के माध्यम से दिनांक-22.01.2023 को रामगढ़ जिला में एक बैठक आहूत की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि दिनांक-21 मई 2023 तक 28 सूत्री मांगों के संदर्भ में सरकार द्वारा कोई सकारात्मक पहल नहीं की जाती है तो दिनांक-22 मई 2023 से सभी कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे।
इस बीच अपनी मांगों के सन्दर्भ में माननीय राज्यपाल महोदय, झारखण्ड सरकार एवं माननीय मुख्यमंत्री, झारखण्ड सरकार से मुलाकात की गई एवं ज्ञापन दिया गया। किन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसी सन्दर्भ में तत्कालीन मुख्य सचिव, झारखण्ड सरकार से मुलाकात की गई। उनके द्वारा मांगों को संक्षिप्त करने एवं हमारी मांगों पर माह जून 2023 के प्रथम सप्ताह में प्रतिनिधिमंडल को वार्ता हेतु बुलाने एवं मांगों की समीक्षा कर शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया।
मुख्य सचिव द्वारा दिये गये आश्वासन एवं महामहिम राष्ट्रपति महोदया के दिनांक-24.05.2023 से 26.05.2023 तक झारखण्ड राज्य के विभिन्न जिलों में प्रस्तावित आगमन एवं भ्रमण कार्यक्रम को लेकर दिनांक-22 मई 2023 से घोषित अनिश्चितकालीन हड़ताल को संघ द्वारा राष्ट्रहित में वापस लिया गया। किन्तु बहुत ही खेद का विषय है कि सरकार के स्तर से किसी प्रकार के वार्ता की पहल नहीं की गई।
संघ की आंतरिक बैठक में सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति को देखते हुए फरवरी माह 2024 में अनिश्चितकालीन हड़ताल में जाने का निर्णय लिया गया किन्तु आसन्न लोकसभा चुनाव को देखते हुए पुनः राष्ट्रहित में आन्दोलन को स्थगित कर दिया गया और लोकसभा चुनाव से संबंधित सभी कार्यों को पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से सम्पन्न कराया गया। ज्ञातव्य है कि लोकसभा निर्वाचन में समाहरणालय एवं संलग्न कार्यालयों के कर्मियों का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।
लोकसभा निर्वाचन के उपरान्त संघ की बैठक में कर्मियों द्वारा हमारी मांगों के सन्दर्भ में उपेक्षापूर्ण नीति अपनाये जाने पर अत्यंत ही खेद एवं निराशा को व्यक्त किया गया एवं इस संबंध में आगे की कार्रवाई हेतु दिनांक-23.06.2024 को राँची में एक बैठक आयोजित की गई जिसमें मांगों को संक्षिप्त कर अतिमहत्त्वपूर्ण 09 सूत्री मांग निर्धारित किया गया तथा निर्णय लिया गया कि अंतिम रूप से अपनी मांगों के संदर्भ में सरकार के संज्ञान में लाने हेतु एक कार्यक्रम निर्धारित किया जाय और यदि इसके बावजूद सरकार द्वारा हमारी मांगों के संदर्भ में कोई पहल नहीं की जाती है तो दिनांक-22.07.2024 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया जाए। इस क्रम में दिनांक-14.07.2024 को राजभवन, राँची के समक्ष महाधरना का आयोजन किया गया। दिनांक-16.07.2024 को काला बिल्ला लगाकर कार्य करना, दिनांक-18.07.2024 को 02 बजे 05 बजे तक सांकेतिक रूप से पेन डाउन एवं दिनांक-20.07.2024 को संध्या में कैंडल मार्च करने का कार्यक्रम किया गया ताकि सरकार का ध्यान हमारी मांगों की ओर आकृष्ट हो सके, किन्तु सरकार के द्वारा इस बार भी किसी प्रकार का संज्ञान नहीं लिया गया, जिसके आलोक में विवश होकर किसी और प्रकार की संवैधानिक उपाय के अभाव में पूर्व में लिये गये निर्णय के आलोक में दिनांक-22.07.2024 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए विवश होना पड़ा।
यहाँ स्पष्ट करना है कि समारहणालय संवर्ग हड़ताल जैसे कार्यक्रम का पक्षधर नहीं है। किन्तु कर्मियों द्वारा दो वर्षों से लगातार प्रयास एवं लगभग तीन बार अनिश्चितकालीन हड़ताल को टालने के बावजूद सरकार की घनघोर उपेक्षा एवं पहल के अभाव तथा राज्य में केन्द्र सरकार की तरह Central Administrative Tribunal जैसे State Administrative Tribunal एवं केन्द्र सरकार की तरह Joint Consultative Machinery (जिसमें सरकार एवं कर्मी अपनी बातों को रख सकें) जैसी संस्थाओं के अभाव में (यद्यपि राज्य सराकार एवं महासंघ के 2009 में हुए समझौते में उपरोक्त दोनों संस्थाओं के गठन पर सहमति बनी थी, किन्तु 16 वर्षों के उपरान्त भी आजतक उपरोक्त संस्थाओं का गठन नहीं हुआ है) कोई और विकल्प नहीं रहने के कारण अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ा।
हमारी मुख्य मांगें क्या है तथा यह किस प्रकार नियमानुकूल एवं जायज है ?
1. समाहरणालय संवर्ग लिपिकों के वेतनमान एवं पदनाम में संशोधन (उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसा के आलोक में)
छठे वेतन आयोग की अनुशंसा 2006 में की गई थी और अन्य राज्यों यथा-उतराखण्ड एवं उत्तरप्रदेश, पंजाब, राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश आदि सरकारों ने 2012 और 2013 में ग्रेड पे एवं पदनाम में परिवर्तन किया गया है।
झारखंड सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन 2014 में किया था जिसके अध्यक्ष सदस्य, राजस्व पर्षद, झारखण्ड एवं सदस्य के रूप में प्रधान सचिव, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, प्रधान सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग एवं प्रधान सचिव, वित्त विभाग, झारखण्ड थे, जिनकी अनुशंसा कार्मिक विभाग, झारखंड के पत्र संख्या- 8940 दिनांक 14 अगस्त 2014 के माध्यम से संप्रेषित की गई है, जिसपर सरकार का अनुमोदन प्राप्त है किन्तु दस वर्षों के बाद भी अभी तक लागू नहीं किया गया है।
उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसा के आधार पर कलेक्ट्रेट कैडर की सेवा नियमावली गठित की गई, लेकिन वेतन एवं पदनाम संबंधी विसंगतियों पर अन्य राज्यों से तुलना करने के लिए बिन्दु संख्या 02 बी पर की गई अनुशंसा पर कार्रवाई नहीं की गई है।
2. समाहरणाल एवं संलग्न कार्यालयों में नये प्रशाखाओं का गठन एवं पदसजृन (उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसा के आलोक में)
ज्ञात है कि झारखण्ड में पद सृजन बिहार के समय 1958 में किया गया है।
1958 में यह दक्षिण बिहार कहलाता था, जिसकी आबादी 80 लाख थी, जो वर्तमान में 4 करोड़ से ज्यादा है। आबादी लगभग 5 गुणा बढ़ी है। किन्तु पदों की संख्या नहीं बढ़ी है।
साहेबगंज, गोड्डा, पाकुड़, कोडरमा, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम आदि दर्जन भर नये जिलों का गठन 20-30-40 वर्ष पूर्व हुआ है किन्तु जिला स्तर पर पदों का सृजन आजतक नहीं हो पाया है, जिसके कारण पदस्थापन, वेतन भुगतान तथा कर्मियों की प्रोन्नति आदि की समस्या लगातार बनी हुई है।
उच्चस्तरीय समिति के द्वारा वर्ष 2014 में अपनी अनुशंसा के क्रमांक-18 में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को वर्तमान में समाहरणालय के कार्यों के बढ़े हुए स्वरूप, विकास, कार्यों के विभिन्न आयाम, एक्ट इत्यादि के ससमय कार्यान्वयन के क्रम में प्रशाखाओं के पुनर्गठन एवं पदों की संरचना के आधार पर समारहणालय एवं अनुमंडल कार्यालयों में नये प्रशाखाओं एवं पदों के सृजन के संबंध में कार्रवाई करने का निदेश दिया गया था। उक्त के आलोक में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखण्ड, राँची के द्वारा 2019 से ही कार्रवाई की जा रही है किन्तु अभी तक पद सृजन की कार्रवाई नहीं हो पाई है।
पदों के सृजन से समाहरणालय एवं संलग्न कार्यालयों में न्यूनतम 5000 नये पदों का सृजन होगा, जिससे स्थानीय युवकों को रोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे तथा व्यवस्था ज्यादा सुदृढ़ होगी और सरकार के सभी योजनाओं का कार्यान्वयन त्वरित गति से हो सकेगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार तथा सुदृढ़ करने एवं रोजगार सृजन के लिए आवश्यक है। इस कार्य को समय सीमा में करवाया जाना चाहिए।
3. सीमित सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से लिपिकों के उच्चतर पद पर जाने की व्यवस्था पूर्व की भांति करना।
ज्ञात है कि सभी सेवा संवर्ग में उच्चतर सेवा में जाने का प्रावधान है। समाहरणालय लिपिकों के लिए अब कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। झारखण्ड प्रशासनिक सेवा में जाने हेतु जो मापण्ड निर्धारित किये गये हैं उससे समाहरणालय के कोई भी कर्मी, जिनके लिए यह व्यवस्था है, वो परीक्षा में बैठ ही नहीं पायेंगे। इसलिए इसमें पूर्व की भांति ग्रेड पे और उम्र सीमा की बाध्यता को किया जाना आवश्यक है ताकि कर्मी इसमें सम्मिलित हो सकें।
4. बिहार सरकार के 2022 की अधिसूचना के आलोक में समाहरणालय लिपिकों के आरक्षित 15 प्रतिशत पदों पर चतुर्थवर्गीय कर्मियों को बिना परीक्षा के वरीयता-सह-योग्यता के आधार पर प्रोन्नति प्रदान करना।
चतुर्थवर्गीय कर्मियों के लिए 15 प्रतिशत पद समाहरणालय लिपिकों के पद में आरक्षित है किन्तु परीक्षा की व्यवस्था लागू कर दिये जाने के कारण पूरे राज्य भर में पिछले 24 वर्षों में मात्र 02 चतुर्थवर्गीय कर्मी का ही निम्नवर्गीय लिपिक में प्रोन्नति हो पाई है, जबकि पड़ोसी राज्य में परीक्षा की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। वरीयता के कारण पूर्व से ही सभी कर्मी निम्नवर्गीय लिपिक से अधिक वेतन पा रहे हैं। इस कारण उन्हें प्रान्नत करने से सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा एवं रिक्त पद भर जायेंगे।
5. नियमावली के आलोक में संविदा/अनुबंध कर्मियों की सेवा नियमित करना।
सरकार द्वारा राज्य सरकार के कार्यालयों में दस वर्षों से अनियमित रूप से कार्यरत कर्मियों की सेवा को नियमित करने हेतु नियमावली बनाई गई। उक्त नियमावली के आलोक में जिला स्तर से प्रस्ताव सरकार को उपलब्ध कराई गई किन्तु सरकार के द्वारा यह कहते हुए प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया गया कि रिक्त पदों के विरूद्ध संविदा/अनुबंध कर्मियों की नियुक्ति नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि कार्यालयों में पदों का सृजन वर्ष 1958 मंह ही हुआ है और संविदा/अनुबंध पर नियुक्ति विगत 15-20 वर्षों से हो रही है। ऐसे में सरकार की नियमवाली में विरोधाभाष है। नियमावली में आवश्यक संशोधन करते हुए इनकी सेवा को नियमित किया जाय अथवा जिस प्रकार वित्त विभाग में संविदा कर्मियों को नियमित किया गया है तदनुरूप इन कर्मियों को भी नियमित किया जाय।
6. समाहरणालय एवं संलग्न कार्यालयों के अन्तर्गत आउटसोर्स पर कार्यरत कर्मियों की सेवा संविदा पर करने एवं कार्य अवधि 60 वर्ष करने तथा समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करना।
आउटसोर्स में कार्यरत कर्मियों के लिए प्रधान सचिव, वित्त विभाग की अध्यक्षता में सचिव, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग एवं सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग एवं CEO, JAP IT सदस्य के रूप में एक कमिटी का गठन मुख्य सचिव, झारखण्ड सरकार के द्वारा ज्ञापांक-2066 दिनांक-20.09.2023 द्वारा किया गया, जिनके द्वारा आउटसोर्स कर्मियों के लिए Comprehensive Policy/SOP तैयार किया जाना है जो लंबित है। ज्ञातव्य है कि सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मियों को वेतन का भुगतान आउटसोर्स कम्पनियों के माध्यम से किया जा रहा है, जिसके कारण जनता का पैसा कमीशन के रूप में कम्पनियों को प्राप्त हो रहा है वहीं कर्मियांे को समान कार्य के लिए समान वेतन प्राप्त नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मियों को संविदा पर रखकर उन्हें सीधे भुगतान किये जाने से राजस्व की बचत होगी एवं कर्मियों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन प्राप्त हो सकेगा।
7. कार्यालय अधीक्षक (ADMINISTRATIVE OFFICER GRADE II) एवं प्रशासी अधिकारी (ADMINISTRATIVE OFFICER GRADE I) के कार्य दायित्व के पुनर्निधारण करना।
सरकार द्वारा प्रशासी अधिकारी का पद वर्ष 2016 में सृजित किया गया है परन्तु विगत 8 वर्षों में उनके कार्य एवं दायित्वों को निर्धारित नहीं किया गया है, जिसके कारण बेहतर कार्य सम्पादन नहीं हो पा रहा है। बेहतर कार्य संस्कृति को विकसित करने के लिए उनके कार्य एवं दायित्व को पुनर्निधारित किया जाना आवश्यक है।
8. सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 वर्ष करना।
भारत में जीवन प्रत्याशा 70 वर्ष हो गई है। तदनुरूप सरकार द्वारा माननीय न्यायधीशों, प्रोफेसरों, डाक्टरों आदि की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाई गई है। उसके आलोक में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र सीमा बढ़ाई जाय।
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